व्यापार समझौते अनिश्चितताओं को खत्म करते हैं, पूंजी सृजन में आती है तेजी: सेबी प्रमुख पांडेय

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बॉन्ड बाजार में स्वागतयोग्य वृद्धि हुई है, लेकिन बाजार को और मजबूत करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इसमें शीर्ष रेटिंग वाली कंपनियों के अलावा अन्य जारीकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाना, अधिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम सुनिश्चित करना और वित्तीय सेवा क्षेत्र से बाहर की कंपनियों को भी इस मार्ग का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

At present, only Nifty futures contracts are traded on the Singapore exchange, of which SGX Nifty is the most popular one.

मुंबई, चार फरवरी (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों के जरिये व्यापारिक तनाव खत्म होने से अनिश्चितताएं दूर होती हैं जिससे पूंजी सृजन में तेजी आने में मदद मिलती है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के विदेशी निवेशकों को देश में अधिक धन लगाने के लिए प्रेरित करने के सवाल पर पांडेय ने कहा कि ऐसे कदम निवेश संबंधी फैसलों को ‘‘प्रोत्साहित’’ कर सकते हैं।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ मूल रूप से जब किसी नियामकीय कार्रवाई का बोझ हटता है और व्यापारिक तनाव खत्म होते हैं, तो पूंजी सृजन की प्रक्रिया हमेशा तेज होती है।’’’

सेबी प्रमुख ने कहा कि अनिश्चितताओं के दूर होने से निवेश निर्णयों को बल मिलता है और पूंजी को लेकर अधिक समझ आती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर मौजूदा हालात में कहा जा सकता है कि व्यापार से जुड़े जो समझौते हुए हैं, उनसे काफी हद तक अनिश्चितताएं दूर हुई हैं।’’

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूती देने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के इतर बातचीत करते हुए पांडेय ने वायदा-विकल्प सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने के सरकार के प्रस्ताव पर टिप्पणी करने से हालांकि इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस समय हम किसी भी नए कदम पर विचार नहीं कर रहे हैं और जो ढांचा हमने लागू किया है, वही जारी रहेगा।”

साप्ताहिक ‘एक्सपायरी’ पर एक सवाल और सेबी के इन्हें प्रतिबंधित करने पर विचार करने के सवाल पर उन्होंने दोहराया कि नियामक इस मामले में यथास्थिति बनाए रखेगा।

इस बीच, बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की जरूरत पर पांडेय ने कहा कि सेबी के एक सर्वेक्ष्ण के अनुसार, अधिक निवेशक बॉन्ड बाजार की तुलना में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में जानते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बॉन्ड बाजार में स्वागतयोग्य वृद्धि हुई है, लेकिन बाजार को और मजबूत करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इसमें शीर्ष रेटिंग वाली कंपनियों के अलावा अन्य जारीकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाना, अधिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम सुनिश्चित करना और वित्तीय सेवा क्षेत्र से बाहर की कंपनियों को भी इस मार्ग का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

पांडेय ने कहा कि पूंजी बाजार नियामक ने बॉन्ड बाजार के लिए ‘‘उचित विनियमन’’ का दृष्टिकोण अपनाया है। हालांकि, उन्होंने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी हितधारकों से साथ आने का आग्रह किया।

बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदररमन राममूर्ति ने एक निश्चित सीमा से अधिक वित्त जुटाने के लिए सार्वजनिक निर्गम के जरिये कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तक पहुंच को अनिवार्य करने और जारीकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट देने का सुझाव दिया।

बीएसई और एनएसई के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में हितधारकों ने अपनी मंशा को बेहतर तरीके से व्यक्त करने के लिए ‘‘ बॉन्ड्स – एक सशक्त बंधन’’ टैगलाइन (प्रचार पंक्ति) भी पेश की।

Published: February 4, 2026, 15:03 IST
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