
सरकार ने देश के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सात उपायों की घोषणा की जिनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता एवं वैकल्पिक व्यापार साधनों को समर्थन शामिल है।
ये उपाय 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का हिस्सा हैं। इस मिशन के 10 में से तीन घटकों को जनवरी में पहले ही लागू किया जा चुका है।
डिजिटल माध्यम से निर्यात करने वालों को समर्थन देने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने ब्याज अनुदान एवं आंशिक ऋण गारंटी के साथ ऋण सुविधाएं शुरू करने की घोषणा की है।
‘डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट’ सुविधा के तहत 50 लाख रुपये तक सहायता 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ उपलब्ध होगी।
‘ओवरसीज इन्वेंटरी क्रेडिट’ सुविधा के अंतर्गत पांच करोड़ रुपये तक सहायता 75 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ दी जाएगी। इस पर 2.75 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा जो प्रति आवेदक सालाना अधिकतम 15 लाख रुपये तक सीमित रहेगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कार्यशील पूंजी के किफायती साधन के रूप में निर्यात ‘फैक्टरिंग’ को बढ़ावा देने हेतु पात्र लेन-देन पर 2.75 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा। यह सुविधा भारतीय रिजर्व बैंक/ आईएफएससीए से मान्यता-प्राप्त संस्थाओं के जरिये उपलब्ध होगी।
एक एमएसएमई को सालाना अधिकतम 50 लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी और पारदर्शिता एवं समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल दावा प्रणाली अपनाई जाएगी।
उभरते निर्यात अवसरों को समर्थन देने के लिए मंत्रालय ने कहा कि इस पहल से निर्यातकों को साझा जोखिम और ऋण संवर्धन साधनों जैसे साख-पत्र की पुष्टि और बातचीत के जरिये नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
इसके तहत, पात्रता परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन खर्चों के लिए ‘पॉजिटिव लिस्ट’ के तहत 60 प्रतिशत और ‘प्रायोरिटी पॉजिटिव लिस्ट’ के तहत 75 प्रतिशत की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी जिसकी वार्षिक सीमा 25 लाख रुपये होगी।
‘ट्रेड रेगुलेशंस, एक्रेडिटेशन एंड कंप्लायंस एनेबलमेंट’ के तहत अंतरराष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन एवं अन्य अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में निर्यातकों को सहायता दी जाएगी।
लॉजिस्टिक समर्थन के तहत निर्यातकों को विदेशी गोदाम जैसी अवसंरचनाओं तक पहुंच प्रदान की जाएगी। स्वीकृत परियोजना लागत की 30 प्रतिशत तक सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए दी जाएगी, जो निर्धारित सीमाओं एवं एमएसएमई भागीदारी मानदंडों के अधीन होगी। इसकी वार्षिक सीमा प्रति निर्यातक 20 लाख रुपये होगी।
व्यापार खुफिया एवं सुविधा प्रदान करने के लिए एकीकृत सहायता के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
यह आम तौर पर परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक सीमित है, जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकार के संस्थानों और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100 प्रतिशत तक समर्थन दिया जा सकता है।
इन समन्वित वित्तीय एवं परिवेश संबंधी हस्तक्षेपों के जरिये सरकार का उद्देश्य पूंजी की लागत को कम करना, व्यापार वित्त साधनों में विविधता लाना, अनुपालन तत्परता को बढ़ाना, रसद संबंधी बाधाओं को दूर करना और सूक्ष्म लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए विदेशी बाजार एकीकरण को मजबूत करना है।
पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए ‘लॉजिस्टिक्स इंटरवेन्शन्स फॉर फ्रेट एंड ट्रांसपोर्ट’ उपाय की घोषणा की गई है। इसके तहत दूरदराज, पहाड़ी, पूर्वोत्तर जिलों के निर्यातकों को भौगोलिक चुनौतियों से राहत देने के लिए पात्र मालभाड़ा व्यय पर 30 प्रतिशत तक आंशिक प्रतिपूर्ति दी जाएगी।
‘इंटीग्रेटेड सपोर्ट फॉर ट्रेड इंटेलिजेंस एंड फैसिलिटेशन’ के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सामान्यतः परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक सीमित होगी, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों के संस्थानों तथा विदेशों में भारतीय मिशनों के प्रस्तावों के लिए 100 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार ने कहा कि इन समन्वित वित्तीय एवं परिवेश आधारित उपायों के माध्यम से पूंजी लागत कम करने, व्यापार वित्त के साधनों में विविधता लाने, अनुपालन क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स बाधाओं को दूर करने और एमएसएमई के लिए विदेशी बाजारों में एकीकरण को मजबूत करने का लक्ष्य है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन उपायों को पेश करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों के लिए सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
मंत्री ने उल्लेख किया कि अब वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 70 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा भारत के लिए सुलभ हो गया है। यह नौ संपन्न एफटीए के माध्यम से संभव हुआ है जिनमें अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण भी शामिल है।
इन समझौतों के तहत 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न क्षेत्रों को तरजीही बाजार पहुंच मिलती है।
वैश्विक व्यापार का लाभ प्रत्येक एमएसएमई, स्टार्टअप और उद्यमी तक पहुंचाने पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि यह मिशन नए उत्पादों, सेवाओं व निर्यातकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय कारोबारों को नए बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले पखवाड़े में भारत ने माल निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की है।
यह मिशन एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ऋण तक पहुंच मजबूत करने, गुणवत्ता मानकों को बेहतर करने, अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन में सहायता देने तथा वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक और गोदाम अवसंरचना का विस्तार करने पर केंद्रित है।
इस अवसर पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये कदम नए बाजारों तक पहुंच बनाने और नए उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होंगे।
उन्होंने निर्यात संवर्धन परिषदों से कहा कि वे भारत द्वारा अंतिम रूप दिए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए एक प्रभावी संचार पैकेज तैयार करें।
वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में देश का निर्यात 2.22 प्रतिशत बढ़कर 366.63 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान आयात 7.21 प्रतिशत बढ़कर 649.86 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा 283.23 अरब डॉलर दर्ज किया गया।