
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को 25 फसलों की 184 नई किस्में जारी करते हुए कहा कि भारत 15.18 करोड़ टन के कुल उत्पादन के साथ चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बन गया है.
चौहान ने कहा कि इन नई उच्च उपज वाली बीज किस्मों से फसल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी.
उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ये नई किस्में किसानों तक जल्दी पहुंचें.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 क्षेत्रीय फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि देश ने अधिक उपज देने वाले बीजों के विकास में बड़ी सफलता हासिल की है.
वर्ष 1969 में राजपत्र अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद से कुल 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें चावल, गेहूं, ज्वार, मक्का, दालें, तिलहन, फाइबर फसलें शामिल हैं.
चौहान ने बताया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 3,236 अधिक उपज देने वाली किस्मों को मंजूरी दी गई है, जबकि 1969 से 2014 के बीच 3,969 किस्मों को अधिसूचित किया गया था.
मंत्री ने कहा कि भारत भोजन की कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य प्रदाता बन गया है.
चौहान ने कहा, “चावल उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है.”
उन्होंने इसे एक अभूतपूर्व उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत का चावल उत्पादन चीन के 14.5 करोड़ टन की तुलना में 15.18 करोड़ टन तक पहुंच गया है.
उन्होंने कहा कि भारत अब विदेशी बाजारों में चावल की आपूर्ति कर रहा है.
चौहान ने कहा कि देश में प्रचूर मात्रा में खाद्यान्न भंडार है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है.
रविवार को जारी की गई 184 उन्नत किस्मों के बारे में बताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि ये किस्में किसानों के लिए लाभकारी होंगी, क्योंकि इससे उन्हें उच्च पैदावार और बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होगी.
चौहान ने कहा कि अधिक उपज देने वाले और जलवायु के अनुकूल बीजों के विकास के बल पर देश कृषि क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है.
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