
केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 को लागू कर दिया गया है. इसके तहत देश में सभी तरह के मनी गेमिंग पर पूरा प्रतिबंध रहेगा. इनमें किसी भी तरह से पैसे के लेनदेन भी शामिल हैं. वहीं, दूसरी ओर आईपीएल की शुरुआत से पहले ही तमाम गेमिंग प्लेटफॉर्म अवैध सट्टेबाजी एप्स के लिए तैयार हो रहे हैं. ये सभी अरबों रुपये के कारोबार करने की तैयारी में हैं.
आईपीएल शुरू होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं, और भारत का अवैध फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का विशाल भूमिगत नेटवर्क एक बार फिर सक्रिय हो रहा है. विदेशी ऐप्स टेलीग्राम प्रमोटरों, इन्फ्लुएंसरों और एफिलिएट मार्केटरों के एक शक्तिशाली नेटवर्क के माध्यम से भारतीय उपयोगकर्ताओं को आक्रामक रूप से निशाना बना रहे हैं. जैसे-जैसे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) नजदीक आ रही है, प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि पूरे भारत में अवैध फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी के नेटवर्क एक बार फिर से सक्रिय हो रहे हैं.
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था हजारों करोड़ रुपये के अवैध उद्योग में तब्दील हो गई है, जहां प्रमोटर कमीशन के रूप में करोड़ों रुपये कमाते हैं, पैसा फर्जी खातों और हवाला चैनलों के माध्यम से इधर-उधर होता है, और लाखों उपयोगकर्ता “जीत की गारंटी वाली फैंटेसी टीमों” के वादों से आकर्षित होते हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और साइबर अपराध इकाइयां सहित प्रवर्तन एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रख रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही कार्रवाई हो सकती है.
आईपीएल इन अवैध प्लेटफॉर्मों के लिए सबसे बड़ा सीज़न होता है. टूर्नामेंट शुरू होने से हफ़्तों पहले ही प्रमोटर अपने नेटवर्क सक्रिय करना शुरू कर देते हैं. भारत का अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग बाज़ार 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है, जो इसे देश की सबसे बड़ी भूमिगत डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाता है. लाखों भारतीय यूजर्स भारत के बाहर होस्ट की गई मिरर वेबसाइटों और मोबाइल ऐप के ज़रिए विदेशी प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल करते हैं. जांच से पता चलता है कि इन प्लेटफॉर्मों पर भारतीय उपयोगकर्ताओं द्वारा हर साल अरबों बार विज़िट की जाती है, खासकर बड़े क्रिकेट टूर्नामेंटों के दौरान.
इस साल की शुरुआत में, सरकार ने 242 अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों को ब्लॉक किया, जिससे ब्लॉक किए गए प्लेटफॉर्मों की कुल संख्या लगभग 8,000 हो गई. लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि वेबसाइटों को ब्लॉक करने से नेटवर्क बंद नहीं हुए हैं. एक साइबर अपराध अधिकारी ने कहा, “जब भी कोई साइट ब्लॉक होती है, कुछ ही घंटों में दूसरी साइट खुल जाती है. इन प्लेटफॉर्मों के पीछे असली ताकत वेबसाइट नहीं है, बल्कि प्रमोशन नेटवर्क है.”
इस पूरे सिस्टम के केंद्र में प्रमोटरों और सहयोगियों का एक शक्तिशाली नेटवर्क है, जो टेलीग्राम प्रमोशन मशीन और सोशल मीडिया ग्रुप्स के ज़रिए काम करते हैं. इन प्रमोटरों के लाखों फॉलोअर्स वाले चैनल हैं. एक ऑनलाइन गेमिंग मार्केटिंग नेटवर्क के पूर्व कर्मचारी ने कहा, “प्रमोटर ऐसा दिखाते हैं जैसे वे लोगों को पैसे जीतने में मदद कर रहे हैं. लेकिन उनका असली काम लोगों को ऐप्स पर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित करना है.” जांचकर्ताओं के अनुसार, पैसे का एक बड़ा हिस्सा हवाला नेटवर्क के ज़रिए विदेशों में स्थित ऑपरेटरों तक पहुंचता है.
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