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वेतन वृद्धि टीसीएस की प्राथमिकता; लाभप्रदता के साथ वृद्धि पर ध्यान: सीएफओ

तिमाही नतीजों में कंपनी को वृद्धि और मार्जिन पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला है. व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों के कारण माँग प्रभावित होने के कारण कंपनी ने गैर-प्रमुख आय में छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और अप्रैल से शुरू होने वाली अपनी वार्षिक वेतन वृद्धि को टाल दिया.

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  • Last Updated : July 13, 2025, 20:03 IST
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देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) समीर सेकसरिया ने कहा है कि अपने छह लाख से ज़्यादा कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करना टीसीएस की ‘प्राथमिकता’ है. जून तिमाही के नतीजे जारी होने के बाद पीटीआई-भाषा से बात करते हुए सेकसरिया ने स्पष्ट किया कि टीसीएस लाभप्रदता के साथ वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करेगी.

तिमाही नतीजों में कंपनी को वृद्धि और मार्जिन पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला है. व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों के कारण माँग प्रभावित होने के कारण कंपनी ने गैर-प्रमुख आय में छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और अप्रैल से शुरू होने वाली अपनी वार्षिक वेतन वृद्धि को टाल दिया.

सेकसरिया ने कहा कि टीसीएस ने अपने प्रतिस्पर्धियों के विपरीत वेतन वृद्धि को शायद ही कभी टाला है. उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिकता वेतन वृद्धि को फिर से लागू करना है.” हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वेतन वृद्धि कब की जाएगी.

सेकसरिया ने कहा कि आमतौर पर, वार्षिक वेतन वृद्धि से परिचालन लाभ मार्जिन में 1.50 प्रतिशत से अधिक की कमी आती है. जून तिमाही में यह आंकड़ा 0.20 प्रतिशत घटकर 24.5 प्रतिशत रह गया, लेकिन सेकसरिया ने ज़ोर देकर कहा कि इरादा मार्जिन को 26-28 प्रतिशत की आकांक्षात्मक सीमा तक बढ़ाने का है.

सेकसरिया ने बताया कि मांग आने पर उसे पूरा करने के लिए अग्रिम भर्तियों में निवेश करने से मार्जिन पर असर पड़ा, क्योंकि मांग की कमी ने उपयोगिता के स्तर को नीचे गिरा दिया. सेकसरिया ने कहा कि जैसे-जैसे कंपनी मार्जिन बढ़ाने की कोशिश कर रही है, उसे कई नियंत्रणीय और अनियंत्रित कारकों से जूझना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि उपयोगिता बढ़ाना और अन्य संगठनात्मक बदलाव नियंत्रणीय हैं, जबकि मांग अनियंत्रित है.

Published: July 13, 2025, 20:03 IST

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