
बाजार नियामक सेबी ने डीमैट खातों में प्रतिभूतियों को जमा करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। इसके तहत अब सौदे की पुष्टि करने वाले पत्र की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इस कदम से प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की अवधि 150 दिन से घटकर 30 दिन हो जाएगी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को जारी एक परिपत्र में कहा कि वर्तमान में सूचीबद्ध कंपनियां, निर्गम पंजीयक और शेयर हस्तांतरण एजेंट (आरटीए) निवेशकों को पुष्टि पत्र (एलओसी) जारी करते हैं, जिसे प्रतिभूतियों को जमा करने के लिए डिपॉजिटरी प्रतिभागियों को प्रस्तुत किया जाता है।
सेबी ने कहा कि इस प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग 150 दिन लगते हैं। ऐसे में निवेशकों की सुविधा बढ़ाने और समय तथा जोखिम को कम करने के लिए एलओसी जारी करने की आवश्यकता को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संशोधित व्यवस्था के तहत, आरटीए और सूचीबद्ध कंपनियां उचित जांच-पड़ताल करने के बाद निवेशकों के डीमैट खातों में सीधे प्रतिभूतियां जमा करेंगी।
सेबी ने कहा कि इस बदलाव से प्रतिभूतियों के जमा होने की समयसीमा 150 दिन से घटकर 30 दिन होने की उम्मीद है और एलओसी के खोने या दुरुपयोग से जुड़े जोखिम समाप्त हो जाएंगे।
नियामक ने कहा कि संशोधित ढांचा दो अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। इस तिथि से पहले जारी की गई कोई भी एलओसी निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रतिभूतियों को डीमैट खातों में जमा करने के लिए उपयोग कर सकते है।।
सेबी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य निवेश को सुगम बनाना, परिचालन दक्षता बढ़ाना और निवेशक संरक्षण को मजबूत करना है।