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जीडीपी वृद्धि, नीतिगत दर में कटौती से कंपनियों के लिए 2025-26 में कर्ज होगा सुलभ: फिच

उच्च पूंजीगत व्यय के बावजूद, कर पूर्व आय मार्जिन व्यापक होने से अगले वित्त वर्ष (अप्रैल 2025-मार्च 2026) में रेटिंग प्राप्त भारतीय कंपनियों के कर्ज लेने से जुड़े मानदंडों में सुधार की उम्मीद है.

  • Money9
  • Last Updated : January 13, 2025, 15:46 IST
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वित्‍त वर्ष 2026 में कंपनियों को आसानी से मिल सकता है लोन
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साख तय करने वाली फिच रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगातार हो रही वृद्धि, बैंक क्षेत्र की वित्तीय स्थिति में सुधार और 2025 में ब्याज दर में कटौती की उम्मीद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनियों के लिए कर्ज लेने को सुलभ बनाएगी.

उच्च पूंजीगत व्यय के बावजूद, कर पूर्व आय मार्जिन व्यापक होने से अगले वित्त वर्ष (अप्रैल 2025-मार्च 2026) में रेटिंग प्राप्त भारतीय कंपनियों के कर्ज लेने से जुड़े मानदंडों में सुधार की उम्मीद है.

हालांकि, वैश्विक स्तर पर जोखिमों, भारतीय रुपये की विनिमय दर में लगातार गिरावट के दबाव के बीच ऊर्जा की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होने पर नकारात्मक जोखिम पैदा हो सकता है. इसके अलावा व्यापार संरक्षणवादी उपायों के कारण निर्यात में गिरावट आती है, तो इससे भी जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं.

फिच ने ‘भारतीय कंपनियों के कर्ज रुख’ शीर्ष से जारी अपनी जनवरी की रिपोर्ट में कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि भारत की जीडीपी में लगातार हो रही वृद्धि का परिदृश्य, बैंक क्षेत्र की वित्तीय सेहत में सुधार और 2025 में नीतिगत दर में कटौती से वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनियों के लिए कर्ज पहुंच बेहतर और सुलभ होगा.’’

यह उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस साल नीतिगत दर में कटौती कर सकता है. इससे पहले, आरबीआई ने नकदी बढ़ाने के मकसद से पिछले महीने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.50 प्रतिशत की कटौती की थी.

फिच ने उम्मीद जतायी है कि वित्त वर्ष 2025-26 में फिच रेटिंग वाली कंपनियों के लिए कुल बिक्री वृद्धि एक से दो प्रतिशत तक सीमित रहेगी (वित्त वर्ष 2024-25 के लिए यह अनुमान 1.5 प्रतिशत). यह मुख्य रूप से तेल, गैस उत्पादन और रिफाइनिंग तथा विपणन कंपनियों पर कम कीमतों के प्रभाव को दर्शाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग वृद्धि देखने को मिलेगी.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 6.5 प्रतिशत होगी और मजबूत बुनियादी ढांचा खर्च के साथ सीमेंट, बिजली, पेट्रोलियम उत्पादों, इस्पात और इंजीनियरिंग और निर्माण (ई एंड सी) कंपनियों के लिए मांग बेहतर होगी.’’

तेल और गैस उत्पादन तथा तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए बिक्री में हल्की कमी की आशंका है. इसका कारण कम कीमतें निम्न-से-मध्यम स्तर पर एकल अंक में मात्रा वृद्धि को संतुलित करती हैं.

फिच को आईटी सेवा कंपनियों के लिए मध्यम स्तर पर केवल एकल अंक में बिक्री वृद्धि की उम्मीद है. इसका कारण प्रमुख विदेशी बाजारों में धीमी आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के मद्देनजर सोच-विचार कर किये जाने वाले खर्च का सीमित रहने की आशंका है.

घरेलू बाजार में बिक्री में हल्की वृद्धि और कम निर्यात के बीच वाहन आपूर्तिकर्ताओं के लिए बिक्री में वृद्धि मध्यम स्तर पर एकल अंक में रह सकती है.

यात्रा और पर्यटन उद्योग में मांग में सुधार जारी रहेगा. हालांकि, सुधार की गति मध्यम होगी. वैश्विक आपूर्ति की अधिकता से रासायनिक कंपनियों की कीमतों पर असर जारी रहेगा.

फिच ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों के लिए राजस्व वृद्धि को शुल्क दर में बढ़ोतरी से समर्थन मिलेगा. वहीं औषधि क्षेत्र को इसकी प्रकृति और अनुकूल क्षेत्र रुख से मदद मिलेगी.

Published: January 13, 2025, 15:46 IST

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