टाटा मोटर्स ने बजट में शुरुआती स्तर के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन की मांग की

उन्होंने ध्यान दिलाया कि वाणिज्यिक क्षेत्र की इलेक्ट्रिक कारें फेम-2 योजना का हिस्सा थीं, लेकिन वे पीएम ई-ड्राइव योजना में शामिल होने से रह गई हैं।

टाटा

टाटा मोटर्स ने आगामी आम बजट में शुरुआती स्तर के इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए विशेष प्रोत्साहन और ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना के तहत वाणिज्यिक परिचालन वाली इलेक्ट्रिक कारों को सहायता देने की मांग की है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ शैलेश चंद्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि जीएसटी सुधारों, रेपो दर में कटौती और कर व्यवस्था में बदलाव जैसे सरकारी हस्तक्षेपों ने यात्री वाहन उद्योग में मांग को फिर से बढ़ा दिया है, लेकिन शुरुआती स्तर के इलेक्ट्रिक वाहन अब भी बिक्री के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”मैं यात्री वाहन और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को फिर से गति देने के लिए सरकार की सराहना करता हूं। बजट में दो चीजों पर गौर किया जा सकता है। पहला, इलेक्ट्रिक वाहनों के शुरुआती खंड पर काफी दबाव है और दूसरा कि क्या सरकार इस पर कुछ प्रोत्साहन देने पर विचार कर सकती है।”

चंद्रा ने बताया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के बाद पेट्रोल कारों की कीमतों में कमी आई है, जिससे शुरुआती स्तर के इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ गया है।

उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने पिछले साल जीएसटी 2.0 और रेपो रेट में कटौती जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिससे समग्र यात्री वाहन उद्योग की मांग बढ़ी है।

विस्तार से बताते हुए चंद्रा ने कहा कि वाणिज्यिक क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ईवी, कुल यात्री वाहन बिक्री का केवल सात प्रतिशत हैं, लेकिन कुल यात्री किलोमीटर में उनका योगदान लगभग 33-35 प्रतिशत है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि वाणिज्यिक क्षेत्र की इलेक्ट्रिक कारें फेम-2 योजना का हिस्सा थीं, लेकिन वे पीएम ई-ड्राइव योजना में शामिल होने से रह गई हैं।

चंद्रा ने कहा कि एक वाणिज्यिक कार सामान्य यात्री कार की तुलना में पांच गुना अधिक चलती है। इसलिए, इस क्षेत्र को मिलने वाली सहायता का पर्यावरण और तेल आयात पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सरकार इसे पीएम ई-ड्राइव में शामिल करने पर विचार कर सकती है।

वाहनों की कीमतें बढ़ाने की योजना के सवाल पर चंद्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा विनिमय दर संबंधी दिक्कतों और कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनी के मार्जिन पर दो प्रतिशत का असर पड़ा है, जिसका बोझ अभी तक उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम तय करेंगे कि कीमतों में कितनी और कब बढ़ोतरी करनी है। इसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी।

Published: January 18, 2026, 18:38 IST
Exit mobile version