
परिवहन मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरी की संपूर्ण पहचान और प्रभावी पुनर्चक्रण सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आधार जैसी अद्वितीय पहचान संख्या देने का प्रस्ताव रखा है.
मसौदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैटरी विनिर्माताओं या आयातकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे हर बैटरी को 21 अंकों का बैटरी पैक आधार नंबर (बीपीएन) दें.
उन्हें संबंधित बैटरी पैक गतिशील डेटा को बीपीएन के आधिकारिक पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा.
दिशा-निर्देशों में कहा गया कि बैटरी विनिर्माताओं या आयातकों की जिम्मेदारी होगी कि वे बाजार में लायी जाने वाली प्रत्येक बैटरी और स्वयं उपयोग में लायी जाने वाली बैटरी को अद्वितीय बीपीएन दें. बीपीएन को स्पष्ट और सुलभ स्थान पर अंकित किया जाना चाहिए और उसका स्थान ऐसा चुना जाना चाहिए कि यह नष्ट या खराब न हो.
बीपीएन बैटरी के कच्चे माल से लेकर निर्माण, उपयोग, पुनर्चक्रण या अंतिम निपटान तक की महत्वपूर्ण जानकारी संग्रहित करेगा.
इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य बैटरी उद्योग में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थिरता लाना है. इससे बैटरियों के प्रदर्शन और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी करने में मदद मिलेगी.
भारत में लिथियम-आयन बैटरियों की अधिकतर मांग (80–90 प्रतिशत) इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए है. इसलिए इस योजना में इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
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