
भारत के स्टार्टअप सेक्टर में पिछले कुछ महीनों से छंटनी का सिलसिला जारी है. एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म Longhouse Consulting की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 से अब तक 4,500 से अधिक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं. फंडिंग में कमी, मुनाफे का बढ़ता दबाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता उपयोग इस ट्रेंड की प्रमुख वजह बनकर सामने आया है. आइए समझते हैं कि स्टार्टअप सेक्टर में नौकरियां क्यों जा रही हैं और आगे क्या संभावनाएं हैं.
छंटनी के पीछे मुख्य कारण
रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर अचानक लगी पाबंदी के कारण कई स्टार्टअप्स को अपना कारोबार बंद करना पड़ा, जिससे बड़े पैमाने पर छंटनी हुई. इसके अलावा निवेशकों का दबाव है कि कंपनियां जल्द से जल्द मुनाफे में आएं. इसी वजह से स्टार्टअप्स अब छोटी और कुशल टीम के साथ काम करने पर ध्यान दे रहे हैं और केवल उन्हीं पदों पर भर्ती कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर कंपनी की ग्रोथ में योगदान देते हैं.
AI-फर्स्ट मॉडल से बदली हायरिंग रणनीति
कई स्टार्टअप्स अब AI-फर्स्ट मॉडल अपना रहे हैं, जिसके तहत कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने पर जोर दिया जा रहा है. उदाहरण के तौर पर, होम डेकोर स्टार्टअप Livspace ने AI पर फोकस बढ़ाने के चलते करीब 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की है. यह ट्रेंड दिखाता है कि कंपनियां टेक्नोलॉजी के जरिए लागत घटाने और दक्षता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
निवेशक दबाव और IPO की तैयारी भी वजह
एचआर विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब उन्हीं स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम संसाधनों में बेहतर प्रदर्शन दिखा सकें. इसी कारण कंपनियां खर्च कम करने, टीम को lean बनाने और केवल जरूरी पदों पर भर्ती करने की रणनीति अपना रही हैं. IPO की तैयारी कर रही कंपनियां भी लागत घटाने और मुनाफा दिखाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं.
Porter, Zepto, Krutrim और Zupee जैसी कंपनियों ने भी इस दौरान अपने workforce में कटौती की है. हालांकि हाल के महीनों में छंटनी की गति कुछ धीमी हुई है. एंट्री-लेवल भर्ती अभी भी सीमित है, लेकिन 4 से 10 साल के अनुभव वाले विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है.
भविष्य में कहां बनेंगे नए रोजगार
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ग्रीन-टेक और AI आधारित स्टार्टअप्स में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इसके अलावा, कंपनियां लागत कम करने के लिए टियर-2 शहरों और रिमोट वर्क मॉडल पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे नए क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.