तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना होगाः गडकरी

गडकरी ने कहा कि फिलहाल दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत को तीसरे स्थान पर पहुंचने के लिए अपना आयात घटाने और निर्यात को बढ़ाने की जरूरत होगी।

There is a need for the cooperatives to work like corporates, and hence, "we need to have a legislation like the Companies Act to get the best out of the sector", he said.

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि अगर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसे आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने पर खास ध्यान देना होगा।

गडकरी ने सीएसआईआर के ‘प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह’ को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि अपशिष्ट (एग्रो-वेस्ट) को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है, जिससे न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता भी कम की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में पेट्रोलियम-रहित घटक बायो-बिटुमेन का इस्तेमाल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक रूपांतरकारी कदम है।

गडकरी ने कहा, ‘एग्रो-वेस्ट के उपयोग से पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण घटेगा और संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल पर आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।’

उन्होंने कहा कि यदि वाहन ईंधन में 15 प्रतिशत मिलावट की जाए तो भारत करीब 4,500 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में बड़ी कमी आ सकती है।

गडकरी ने कहा कि फिलहाल दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत को तीसरे स्थान पर पहुंचने के लिए अपना आयात घटाने और निर्यात को बढ़ाने की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि भारत व्यावसायिक स्तर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे, ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मंत्री ने बायो-बिटुमेन के इस्तेमाल को टिकाऊ विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार वृद्धि की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

गडकरी ने कृषि और निर्माण उपकरण विनिर्माताओं से वैकल्पिक ईंधन और फ्लेक्स-इंजन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की अपील की।

उन्होंने बताया कि सरकार ने हरित हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 राजमार्ग खंड चिन्हित किए हैं। लेकिन उन्होंने हाइड्रोजन ईंधन के परिवहन को एक बड़ी चुनौती बताया।

गडकरी ने कहा कि भारत को ऊर्जा का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बनना चाहिए। गडकरी ने कहा कि देश हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च करता है, जिसकी वजह से प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है।

Published: January 7, 2026, 17:11 IST
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