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टाटा संस के आईपीओ में हितों का टकराव, वेणू श्रीनिवासन आरबीआई और टाटा दोनों के बोर्ड में

विश्लेषकों का कहना है कि जब वेणु श्रीनिवासन आरबीआई और टाटा दोनों के बोर्ड में हैं तो यह एक गंभीर मामला है जो सीधे-सीधे हितों के टकराव को दर्शाता है.

  • Money9
  • Last Updated : October 16, 2024, 11:12 IST
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टाटा संस के आईपीओ में हितों का टकराव
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टाटा संस के आईपीओ को लेकर अब एक नया मामला सामने आया है. टाटा संस को हितों के टकराव के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि टाटा संस ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्केल-आधारित विनियमन (SBR) ढांचे के तहत अनिवार्य सार्वजनिक लिस्टिंग से बचने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है. यह विवाद टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन की संलिप्तता से उपजा है, जो आरबीआई के बोर्ड के सदस्य भी हैं.

दरअसल, आरबीआई के एसबीआर नियमों के तहत एनबीएफसी को शेयर बाजार में लिस्ट होना है. इसकी अंतिम तारीख अगले साल सितंबर तक है. एसबीआर में शामिल 15 कंपनियों में से अधिकतर लिस्ट हो चुकी हैं और कुछ ही बची हैं. इनमें टाटा संस भी है. टाटा संस ने आरबीआई से लिस्टिंग की छूट मांगी है, जिस पर अभी भी फैसला नहीं हुआ है. विश्लेषकों का कहना है कि जब वेणु श्रीनिवासन आरबीआई और टाटा दोनों के बोर्ड में हैं तो यह एक गंभीर मामला है जो सीधे सीधे हितों के टकराव को दर्शाता है.

14 जून, 2022 को चार साल के कार्यकाल के लिए आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल में नियुक्त श्रीनिवासन पर हितों के संभावित टकराव में शामिल होने का आरोप है. हालांकि, टाटा संस अपने कर्ज को चुकाने और पंजीकरण प्रमाणपत्र के स्वैच्छिक सरेंडर कर लिस्टिंग से बचना चाहती है. आलोचकों का तर्क है कि आरबीआई बोर्ड में श्रीनिवासन की स्थिति नैतिक चिंताओं को जन्म देती है, क्योंकि उनका टाटा ट्रस्ट से जुड़ाव है.

SBR दिशानिर्देश आरबीआई द्वारा 22 अक्टूबर, 2021 को जारी किए गए थे, जिसमें कुछ एनबीएफसी को स्टॉक एक्सचेंजों पर खुद को सूचीबद्ध करने की जरूरत थी, विशेष रूप से एसबीआर ढांचे के अपर लेयर में जो कंपनियां वर्गीकृत हैं. ये दिशानिर्देश 1 अक्टूबर, 2022 से प्रभावी हो गए. आईपीओ फंडिंग पर विशिष्ट निर्देश 1 अप्रैल, 2022 को प्रभावी हो गए और श्रीनिवासन को 14 जून, 2022 को आरबीआई बोर्ड में नियुक्त किया गया था.

14 सितंबर, 2023 को, आरबीआई ने टाटा संस सहित अपर लेयर में रखे गए 15 एनबीएफसी के नाम जारी किए. ऐसी कंपनियों को सूचीबद्ध करना कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाता है. हितों के टकराव की स्थिति ने गवर्नेंस के व्यापक मुद्दे और प्रमुख नियामक पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है. इससे पहले आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को तमिलनाडु सरकार ने 2006 से 2008 तक टाटा समूह की कंपनी टाइटन के अध्यक्ष के रूप में नामित किया था.

अपर लेयर में वर्गीकृत कंपनियों में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, एलएंडटी फाइनेंस और टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय कंपनियां शामिल हैं. टाटा संस को छोड़कर, इन सभी संस्थाओं ने या तो आरबीआई की अनिवार्य लिस्टिंग आवश्यकता का पालन किया है या इसे पूरा करने के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया है.

बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि टाटा संस का आईपीओ पर्याप्त शेयरधारक मूल्य को अनलॉक कर सकता है, अनुमान है कि 5% हिस्सेदारी भी 55,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटा सकती है. इससे बाजार की तरलता और ट्रेडिंग वॉल्यूम में वृद्धि होगी. इसके अलावा, लिस्टिंग से मौजूदा शेयरधारकों के लिए तरलता बढ़ेगी और टाटा संस की ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ेगी. जून 2024 तक, टाटा भारत का सबसे मूल्यवान ब्रांड बना हुआ है, जिसका मूल्य 28.6 बिलियन डॉलर है.

Published: October 16, 2024, 11:12 IST

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