ICICI प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड में 10 लाख का निवेश 7 साल में हो गया 37.76 लाख

स्कीम सीमित लेकिन चुनी हुई कंपनियों में निवेश करती है और इसमें एक्टिव शेयर ऊंचा रहता है. इसका फोकस उन मौकों पर होता है, जहां किसी कंपनी में सुधार या वैल्यू बढ़ने की संभावना को बाजार अभी ठीक से नहीं पहचान पाया होता. 31 दिसंबर 2025 तक, इस पोर्टफोलियो में बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों की हिस्सेदारी ज्यादा थी.

फंड ने किया मालामाल

ICICI प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो स्पेशल सिचुएशन थीम पर काम करती है. इस स्कीम ने निवेशकों को बेहतर निवेश अनुभव देते हुए अपने सात साल पूरे कर लिए हैं. जनवरी 2019 में लॉन्च इस स्कीम का मकसद उन कंपनियों में निवेश करके लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना है, जो कॉर्पोरेट पुनर्गठन, सरकारी नीतियों या नियमों में बदलाव, किसी सेक्टर में उथल-पुथल या ऐसी ही दूसरी खास लेकिन अस्थायी चुनौतियों से गुजर रही होती हैं. यह स्कीम नीचे से ऊपर की यानी बॉटम-अप स्टॉक चुनने की रणनीति अपनाती है और इसमें मार्केट-कैप या सेक्टर की कोई पाबंदी नहीं होती.

स्कीम की शुरुआत यानी 15 जनवरी 2019 को लगाए गए 10 लाख रुपये, 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 37.76 लाख रुपये हो गए होते, यानी सालाना 21.02% की दर से बढ़त. वहीं, यही रकम स्कीम के बेंचमार्क निफ्टी 500 TRI में लगाई जाती, तो वह 28.05 लाख रुपये होती, यानी 15.97% की सालाना बढ़त. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की इस स्कीम ने एक साल में 13 प्रतिशत, तीन साल में 23 प्रतिशत और पांच साल में 27 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है.

इस स्कीम की निवेश सोच इस विचार पर टिकी है कि अनिश्चितता के दौर अक्सर कीमतों में गड़बड़ी यानी मिसप्राइसिंग के मौके पैदा करते हैं. ये अनिश्चितताएं किसी कंपनी, किसी सेक्टर या पूरे अर्थव्यवस्था के स्तर पर हो सकती हैं, जैसे आर्थिक सुस्ती, नियमों में बदलाव, भू-राजनीतिक घटनाएं या कारोबार में अस्थायी रुकावटें. यह स्कीम उन कंपनियों में निवेश करना चाहती है, जहां ऐसी परेशानियां अस्थायी हों और लंबे समय की बुनियादी मजबूती बनी हुई हो.

ICICI प्रूडेंशियल एएमसी के ईडी और सीआईओ और ICICI प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड के फंड मैनेजर शंकरन नरेन ने कहा, स्पेशल सिचुएशंस ऐसे खास मौके होते हैं, जिनका सामना कंपनियों को समय-समय पर करना पड़ता है. ये अचानक बाजार में उथल-पुथल, इंडस्ट्री में विलय, नियमों में बदलाव जैसी स्थितियां हो सकती हैं. ऐसी कंपनियों में निवेश करने का मकसद इन पलों को लंबे समय के निवेशकों के लिए मौके में बदलना होता है. अगर इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए, तो भविष्य में अच्छा खासा फायदा मिल सकता है. इस तरह के निवेश में गहरी रिसर्च की जरूरत होती है, ताकि कंपनी की असली क्षमता और उससे जुड़े जोखिम दोनों को समझा जा सके. लंबे समय में स्पेशल सिचुएशन में निवेश अच्छा अल्फा दे सकता है, लेकिन कम समय में इसमें उतार-चढ़ाव रह सकता है.

नरेन के मुताबिक, यह स्कीम सीमित लेकिन चुनी हुई कंपनियों में निवेश करती है और इसमें एक्टिव शेयर ऊंचा रहता है. इसका फोकस उन मौकों पर होता है, जहां किसी कंपनी में सुधार या वैल्यू बढ़ने की संभावना को बाजार अभी ठीक से नहीं पहचान पाया होता. 31 दिसंबर 2025 तक, इस पोर्टफोलियो में बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों की हिस्सेदारी ज्यादा थी. इसमें फाइनेंशियल्स, आईटी, फार्मा, कंस्ट्रक्शन और दूसरे सेक्टर शामिल थे, जो दिखाता है कि यह स्कीम मौके पर आधारित होने के साथ-साथ अच्छी तरह डाइवर्सिफाइड भी है.

सिस्टमैटिक इन्वेस्टिंग यानी SIP इस स्कीम की रणनीति का अहम हिस्सा है. चूंकि स्पेशल सिचुएशंस कभी भी सामने आ सकती हैं, ऐसे में SIP के जरिए निवेशक अलग-अलग बाजार दौर में अनुशासन के साथ निवेश कर सकते हैं, जिससे लंबे समय में बेहतर नतीजे मिलने की संभावना रहती है. ICICI प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड उन निवेशकों के लिए मुफीद है जो लंबे समय में वेल्थ बनाना चाहते हैं और जो स्पेशल सिचुएशंस पर आधारित इक्विटी निवेश से जुड़ी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति को झेलने में सहज हैं.

Published: January 14, 2026, 11:42 IST
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