
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को संशोधित ‘रिजर्व बैंक – एकीकृत लोकपाल (ओंबड्समैन) योजना, 2026’ जारी की। इसका उद्देश्य बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं के पीड़ित ग्राहकों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के समाधान की दक्षता में और सुधार करना है।
यह योजना एक जुलाई, 2026 से लागू होगी।
संशोधित योजना पर जारी परिपत्र के अनुसार, ‘चूंकि इस योजना का उद्देश्य शिकायतों का कम लागत में और त्वरित निवारण प्रदान करना है, इसलिए इसके तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होगी और यह साक्ष्य के किसी भी नियम से बाध्य नहीं होगी।’
रिजर्व बैंक इस योजना के तहत सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए अपने एक या अधिक अधिकारियों को आरबीआई लोकपाल और आरबीआई उप-लोकपाल’ के रूप में नियुक्त करेगा।
ये नियुक्तियां सामान्यतः एक बार में तीन साल की अवधि के लिए की जाएंगी।
आरबीआई ने कहा कि वह इस योजना के तहत दर्ज शिकायतों को प्राप्त करने और उनकी जांच के लिए एक या अधिक स्थानों पर ‘केंद्रीकृत रसीद एवं प्रसंस्करण केंद्र’ (सीआरपीसी) स्थापित करेगा। ग्राहक अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज करा सकते हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि शिकायतों पर विचार करते समय, आरबीआई लोकपाल/उप-लोकपाल बैंकिंग कानून के सिद्धांतों, गतिविधियों और समय-समय पर रिजर्व बैंक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों व नियमों को ध्यान में रखेंगे।
योजना की एक खास बात यह है कि आरबीआई लोकपाल के पास लाए जाने वाले विवाद की राशि पर कोई सीमा नहीं है। लोकपाल समझौते की सुविधा दे सकता है या निर्णय पारित कर सकता है।
परिपत्र के मुताबिक, ‘हालांकि, शिकायतकर्ता को हुए किसी भी परिणामी नुकसान के लिए, आरबीआई लोकपाल के पास 30 लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति प्रदान करने की शक्ति होगी।’
इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता के समय की बर्बादी, खर्च, उत्पीड़न या मानसिक पीड़ा के लिए लोकपाल तीन लाख रुपये तक का क्षतिपूर्ति दिला सकता है।
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