
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के प्रतिष्ठित और रसूखदार व्यवसायी रहे सेठ जुम्मा लाल रूठिया के परिवार की तीसरी पीढ़ी के एक सदस्य ने दावा किया है कि करीब 109 साल पहले तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनके दादा से 35,000 रुपये का ‘युद्ध ऋण’ लिया था, जिसे आज तक लौटाया नहीं गया है।
दिवंगत व्यवसायी सेठ जुम्मा लाल रूठिया के पोते, विवेक रूठिया अब ब्रिटेन की सरकार को एक कानूनी नोटिस भेजने की योजना बना रहे हैं ताकि उन्हें 1917 में लिया गया यह कथित कर्ज उन्हें वापस मिल सके।
पैंसठ वर्षीय विवेक रूठिया ने ब्रिटिश हुकूमत के साथ कर्ज के लेन-देन के दस्तावेज होने का दावा करते हुए कहा कि अंग्रेज देश छोड़कर चले गए लेकिन आज तक इस कर्ज को नहीं लौटाया।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार को कर्ज देने के 20 साल बाद 1937 में उनके दादा की मौत हो गई थी।
साल 1917 में प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान, भारत में ब्रिटिश प्रशासन ने अपने युद्ध प्रयासों का समर्थन करने के लिए स्थानीय नागरिकों से धन मांगा था।
विवेक रूठिया ने कहा कि पुनर्भुगतान की राशि अब करोड़ों रुपये में होगी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘उस समय सोने की क्या कीमत थी और आज क्या है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है।’
विवेक रूठिया ने चार जून, 1917 को भोपाल में ब्रिटिश ‘‘पॉलिटिकल एजेंट’’ द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र दिखाया गया जिसमें कहा गया है, ‘‘सेठ जुम्मा लाल ने भारतीय युद्ध ऋण के लिए 35,000 रुपये दिए और इस तरह सरकार एवं साम्राज्य के प्रति अपनी वफादारी दिखाई।’’
विवेक रूठिया ने कहा कि उन्हें दादाजी की वसीयत में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के साथ पत्राचार का विवरण देने वाले दस्तावेज मिले, जो स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अंग्रेजों ने पैसे उधार लिए थे।
उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, एक संप्रभु राष्ट्र सैद्धांतिक रूप से अपने पिछले ऋणों को चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
उन्होंने कहा कि उनके पास सभी दस्तावेज हैं और वह अपने कानूनी सलाहकार से सलाह लेने के बाद ब्रिटेन सरकार को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
विवेक रूठिया ने कहा कि उन्हें वसीयत में ब्रिटिश हुकूमत के साथ हुई लिखा-पढ़ी के दस्तावेज मिले हैं, जिससे साफ होता है कि अंग्रेजों ने यह राशि भोपाल रियासत में अपने प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए ली थी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आजादी से पहले रूठिया परिवार सीहोर और भोपाल रियासत के सबसे बड़े पूंजीपति परिवारों में शामिल था तथा आज भी सीहोर शहर की 40 से 45 फीसदी बसाहट उनकी जमीन पर बसी है।
विवेक रूठिया ने कहा कि इंदौर, सीहोर और भोपाल में कई ऐसी संपत्तियां हैं जो रूठिया परिवार के नाम पर पंजीकृत हैं, लेकिन उन्हें उनके बारे में पता नहीं है और अगर उन्हें पता भी है तो उन पर अन्य लोगों का कब्जा है।