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बिजली की कोई कमी नहीं, भारत ऊर्जा अधिशेष देश के रूप में उभर रहा: मनोहर लाल

त्री ने मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में औसत बिजली आपूर्ति 12.5 घंटे (2014) से बढ़कर 22.6 घंटे (2025) हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 23.4 घंटे तक पहुंच गई है।

  • Money9
  • Last Updated : June 10, 2025, 21:09 IST
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बिजली की मांग
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केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को कहा कि पिछले दो महीनों के दौरान देश में बिजली की कोई कमी नहीं हुई और भारत ऊर्जा अधिशेष राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।

मंत्री ने मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में औसत बिजली आपूर्ति 12.5 घंटे (2014) से बढ़कर 22.6 घंटे (2025) हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 23.4 घंटे तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 तक बिजली की कमी 0.1 प्रतिशत थी। यह 2013-14 में अनुभव की गई 4.2 प्रतिशत की कमी की तुलना में शानदार सुधार है।

मंत्री ने कहा कि चूंकि बिजली की मांग मौसम पर निर्भर करती है, इसलिए इस गर्मी के मौसम में भारत की बिजली की अधिकतम मांग 241 गीगावाट (नौ जून को) को छू गई, जबकि पिछले साल 30 मई, 2025 को बिजली की अधिकतम मांग 250 गीगावाट के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर थी।

लाल ने यह भी कहा कि इस गर्मी के मौसम में बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट को छू सकती है।

अभी तक बिजली की अधिकतम मांग अनुमान से कम रही है, क्योंकि मई में बेमौसम बारिश ने घर, दफ्तरों को ठंडा रखने वाले कूलर और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों के इस्तेमाल को कम कर दिया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मई 2024 में बिजली की खपत 155.15 अरब यूनिट थी।

उन्होंने कहा कि 2034 तक विकास के लिए 1,100 केवी की नौ लाइनों की पहचान की गई है। इन लाइनों और उपकरणों के लिए परीक्षण सुविधाएं केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान विकसित कर रहा है। इसके लिए लगभग 53,000 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।

मंत्रालय ने वर्तमान में कार्यान्वयन के तहत 13.2 गीगावाट घंटे के अलावा 30 गीगावाट घंटे बीईएसएस (बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली) विकसित करने की परियोजना को व्यवहारिक बनाने के लिए वित्त पोषण योजना को मंजूरी दी है। इस पर 5,400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

उन्होंने कहा कि इससे देश की 2028 की बीईएसएस आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी और लगभग 33,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा। इसके लिए अगले तीन महीनों में निविदाएं जारी होने की उम्मीद है।

लाल ने कहा कि भंडारण परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क की छूट 30 जून, 2028 तक बढ़ा दी गई है, और इससे पहले आवंटित पंप स्टोरेज परियोजनाएं और चालू की गई बीईएसएस परियोजनाएं लाभ के लिए पात्र होंगी।

उन्होंने कहा कि यह विस्तार देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक भंडारण के विकास का समर्थन करेगा।

सरकार ने पारेषण लाइनें बिछाने के लिए भूमि मालिकों को दिए जाने वाले मुआवजे में भी वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि इस कदम से अंतर-राज्यीय पारेषण नेटवर्क के विस्तार में अधिक निजी निवेश आकर्षित होगा।

अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए लाल ने कहा कि 2024-25 में कुल बिजली उत्पादन में सालाना 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुअर्। यह आंकड़ा 1,739 अरब यूनिट (वित्त वर्ष 2023-24) से बढ़कर 1,829 (वित्त वर्ष 2024-25) हो गया। देश में कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 475 गीगावाट (मार्च 2025) है, जबकि 2014 में यह 249 गीगावाट थी।

उन्होंने बताया कि संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत 19.8 करोड़ स्मार्ट मीटर, 52.5 लाख वितरण ट्रांसफार्मर और 2.1 लाख फीडर मीटर स्वीकृत किए गए हैं।

आरडीएसएस के तहत करीब दो करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। कुल मिलाकर विभिन्न योजनाओं के तहत पूरे भारत में तीन करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

Published: June 10, 2025, 21:09 IST

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