
उन्होंने कहा, ‘‘ आज तमिलनाडु की आर्थिक वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक 11.19 प्रतिशत है। स्पष्ट रूप से कहें तो पिछले साल भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 4.5 प्रतिशत रही जबकि तमिलनाडु की वृद्धि इससे तीन गुना 14.7 प्रतिशत रही।’’
‘कन्वर्जन कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि यह द्रविड़ मॉडल शासन की आलोचना करने वालों को उनके ‘‘ काम के जरिये दिया गया जवाब ’’ है।
यह शिखर सम्मेलन निवेश समझौतों को क्रियान्वित परियोजनाओं में बदलने की प्रक्रिया को दर्शाने की एक अनूठी पहल है।
उन्होंने कहा, ‘‘ केवल इस सम्मेलन में ही हम 52 कंपनियों के उद्घाटन, 71 कंपनियों के शिलान्यास और दो नई कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के जरिये उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक क्षमता का उल्लेख किया और बदलाव लाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक बार एमओयू पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, उसकी प्रगति पर समर्पित ‘डैशबोर्ड’ के जरिये नजर रखी जाती है।
स्टालिन के साथ कार्यक्रम में उद्योग मंत्री टी. आर. बी. राजा भी मौजूद रहे।
उन्होंने कागजों पर हस्ताक्षर से वास्तविक परिणाम तक सरकार के बदलाव का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि यह सम्मेलन तमिलनाडु द्वारा अपनाई गई ‘‘इंक टू इम्पैक्ट’’ सोच का उत्सव है।
उन्होंने कहा, ‘‘ किसी अन्य राज्य में एमओयू को वास्तविक निवेश में बदलने को साबित करने के लिए ‘कन्वर्जन कॉन्क्लेव’ आयोजित करने का न तो साहस है और न ही क्षमता।’’
उन्होंने कहा कि सरकार केवल निवेश की मात्रा पर नहीं, बल्कि नौकरियों की संख्या, गुणवत्ता एवं स्थान पर ध्यान देती है।
मंत्री ने केंद्रीय सरकार के ईपीएफ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हाल में राज्य में 29.63 लाख नौकरियां सृजित हुई हैं और मौजूदा निवेशों से कुल 36.52 लाख नौकरियों की संभावना है।
इस सम्मेलन में भारत बायोटेक के कृष्णा एल्ला तथा होमरुन हेल्थकेयर और बिग टेक के अधिकारियों सहित उद्योग जगत के लोगों ने शिरकत की। इसके अलावा राज्य योजना आयोग के चेयरमैन जे जयरंजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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