
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के वैश्विक वृद्धि में 16 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने का उल्लेख करते हुए शुक्रवार को भरोसा जताया कि भारत भविष्य में विश्व अर्थव्यवस्था का नया इंजन बनकर उभरेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के इस दशक में भारत सुधारों की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सुधार किसी मजबूरी में नहीं बल्कि प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक वृद्धि में 16 प्रतिशत का योगदान देता है और मुझे विश्वास है कि भविष्य में हमारी हिस्सेदारी और बढ़ेगी। भारत दुनिया की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए तैयार है।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, ‘पिछले दशक की शुरुआत में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि वह और भी नीचे खिसक जाएगा। लेकिन आज देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।’
उन्होंने कोविड-19 महामारी और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय ही किसी देश की असली क्षमता सामने आती है।
मोदी ने कहा, ‘मुझे गर्व है कि तमाम व्यवधानों के बावजूद यह दशक अभूतपूर्व विकास, बेहतर क्रियान्वयन और लोकतंत्र की मजबूती का रहा है।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं लेकिन 2014 से पहले सरकार की दृष्टि नहीं होने से ऐसा नहीं हो पा रहा था।
मोदी ने कहा, ‘पहले नीतिगत मोर्चे पर अनिर्णय की स्थिति, घोटालों और भ्रष्टाचार के माहौल के कारण भारत को पांच नाजुक देशों के समूह ‘फ्रेजाइल फाइव’ का हिस्सा माना जाता था। ऐसे में किसका भारत पर भरोसा होता।’
उन्होंने कहा कि आज भारत विश्वास से पूर्ण होने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने के कारण व्यापार समझौतों का हिस्सा बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक फरवरी को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को और गति दी है। इसमें पूंजीगत व्यय बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसका अर्थव्यवस्था की क्षमता, उत्पादकता और रोजगार सृजन पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकारों के समय बजट का ध्यान सिर्फ आवंटन और उत्पादों के सस्ता एवं महंगा होने पर ही केंद्रित होता था और कोई भी यह नहीं पूछता था कि बाद में उन योजनाओं का क्या हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमारी सरकार ने बजट को केवल आवंटन-केंद्रित नहीं, बल्कि परिणाम-केंद्रित बनाया है।’
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