
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को कहा कि बैंक बेहतर पृष्ठभूमि और मजबूत वित्तीय स्थिति वाली सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (एमएसई) को 25 लाख रुपये तक का गारंटीमुक्त ऋण दे सकते हैं।
केंद्रीय बैंक ने इसके लिए ‘सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को ऋण’ से संबंधित निर्देशों में संशोधन किया है।
आरबीआई ने बताया कि मौजूदा नियमों में संशोधन कर सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की अनिवार्य सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।
आरबीआई ने कहा, ‘बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार, एमएसई इकाइयों के बेहतर पृष्ठभूमि और वित्तीय स्थिति के आधार पर, 25 लाख रुपये तक के ऋण के लिए ‘गारंटी’ की आवश्यकता को समाप्त करने की सीमा बढ़ा सकते हैं।’
इसके अलावा, बैंक जहां लागू हो वहां ‘क्रेडिट गारंटी योजना’ के कवर का लाभ भी उठा सकते हैं।
संशोधित निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि ऋण लेने वाला व्यक्ति बिना गारंटी वाली सीमा तक के ऋण के लिए अपनी मर्जी से सोना या चांदी गिरवी रखता है, तो इसे उपरोक्त नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
इन संशोधनों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए आरबीआई ने कहा कि इसका उद्देश्य उन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण वितरण की अंतिम कड़ी को मजबूत करना है, जिनके पास गारंटी के तौर पर गिरवी रखने के लिए सीमित संपत्ति है।
ये संशोधित निर्देश एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
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