
देश में मोटर वाहनों की खुदरा बिक्री जनवरी में सालाना आधार पर करीब 18 प्रतिशत बढ़कर 27 लाख इकाई से अधिक रही। जीएसटी में बदलाव के बाद बनी गति, फसल एवं शादियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर नकदी प्रवाह तथा मालवाहन क्षेत्र में लगातार मांग की स्पष्टता इस वृद्धि की मुख्य वजह रही। वाहन डीलर के निकाय फाडा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में कुल खुदरा बिक्री 27,22,558 इकाई रही जो जनवरी 2025 के 23,14,940 इकाई के मुकाबले 17.61 प्रतिशत अधिक है।
यात्री वाहन खुदरा बिक्री जनवरी में 5,13,475 इकाई रही जो एक साल पहले की समान अवधि के 4,78,915 इकाई की तुलना में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
फाडा अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर ने बयान में कहा, ‘‘ वृद्धि की कहानी तेजी से महानगरों से इतर भारत में लिखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री वाहन बिक्री सालाना आधार पर 14.43 प्रतिशत बढ़ी जो शहरी क्षेत्रों की 2.75 प्रतिशत वृद्धि से कहीं अधिक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ इससे शीर्ष शहरों से आगे यात्री वाहन मांग के संरचनात्मक विस्तार की पुष्टि होती है जिसे एसयूवी/कॉम्पैक्ट एसयूवी की मजबूत पसंद, छोटी कारों की वापसी, उत्पाद उपलब्धता एवं लगातार योजनाओं से समर्थन मिला है।’’
दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री जनवरी में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 18,52,870 इकाई हो गई।
विग्नेश्वर ने कहा, ‘‘ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पोंगल/मकर संक्रांति, शादी के मौसम की आवाजाही और बेहतर वहनीयता से बिक्री मजबूत बनी रही। वहीं शहरी बाजारों में भी स्पष्ट सुधार दिख रहा है जो त्योहारी खरीदारी से आगे मांग के सामान्य होने का संकेत है।’’
तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले महीने क्रमशः 19 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई । वहीं जनवरी में ट्रैक्टर पंजीकरण सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 1,14,759 इकाई हो गया।
आगामी तीन महीनों के कारोबारी परिदृश्य पर फाडा ने कहा कि डीलर का भरोसा मजबूत बना हुआ है। 79.70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वृद्धि की उम्मीद जताई है जबकि केवल 1.88 प्रतिशत ने गिरावट की आशंका व्यक्त की।
वाहन डीलर के निकाय फाडा ने कहा कि निकट अवधि का व्यापक आर्थिक माहौल सहायक है। बुनियादी ढांचे एवं कृषि पर जोर देने वाला विकासोन्मुख बजट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में बदलाव के बाद नीतिगत निरंतरता और 2025 में ढील के बाद ब्याज दरों में स्थिरता…ये सभी मिलकर वहनीयता, वित्तपोषण सहजता और खरीद इरादों को बेहतर बना रहे हैं।